ऑक्शन के पीछे

आईपीएल 14वें सीजन का ऑक्शन भी कई नए रेकॉर्ड बनाकर संपन्न हुआ। हालांकि कोरोना के साये में यूएई में खेले गए 13वें सीजन के मैच आईपीएल के इतिहास में सबसे बेरौनक मुकाबलों के रूप में दर्ज हुए। न स्टेडियम में दर्शकों की मौजूदगी थी और न चीयरलीडर्स का पुराना जलवा था। इन सबको ध्यान में रखते हुए ऐसा लग रहा था कि 2021 के आईपीएल के लिए होने वाली नीलामी में पहले जैसा उत्साह संभवतः न दिखे। मगर आठों फ्रैंचाइजी क्रिकेटरों की खरीद को लेकर पूरे जोश में थे। मनचाहे खिलाड़ी हासिल करने के इनके जज्बे का ही कमाल था कि आईपीएल के पूरे इतिहास में सबसे महंगे खिलाड़ी का तमगा युवराज सिंह से छिनकर क्रिस मॉरिस के पास चला गया, जिन्हें राजस्थान रॉयल्स ने 16.25 करोड़ रुपये में खरीदा।

कई और खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्हें बेस प्राइस से आश्चर्यजनक ऊंचाई वाली कीमतें हासिल हुईं। पिछले 13-14 वर्षों में आईपीएल एक ऐसा ग्लोबल फिनोमना बन चुका है जो क्रिकेट के अलावा भी तमाम क्षेत्रों का ध्यान खींचता है। स्वाभाविक ही इससे जुड़ी गतिविधियों का अन्य कोणों से भी विश्लेषण चलता रहता है और उनके अलग-अलग मायने निकाले जाते रहते हैं। इसके ऑक्शन में खिलाड़ियों की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव भी बहुतों को चकित करते हैं। अक्सर हैरानी से पूछा जाता है कि क्या इस मंडी में कीमतों का कोई लॉजिक भी है? जाहिर है, आठ फ्रैंचाइजी अपनी-अपनी टीम तैयार करने के लिए किस तरह की रणनीति अपना रहे हैं और उनमें किसकी क्या प्राथमिकता है, इसका सटीक हिसाब रखना किसी बाहरी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है।

ऐसे में किसी खास खिलाड़ी पर अगर दो-तीन क्लबों की नजर टिक गई तो स्वाभाविक ही उसकी बोली चढ़ती जाती है। ऐसे में बहुत संभव है कि किसी फ्रैंचाइजी को कोई अच्छा खिलाड़ी कम कीमत में मिल जाए जबकि किसी नए खिलाड़ी के लिए अपेक्षा से ज्यादा कीमत देनी पड़ जाए। लेकिन क्रिकेट ही नहीं मैनेजमेंट का भी कोई अच्छा जानकार बता सकता है कि किसी टीम की बेहतरीन परफॉरमेंस सिर्फ स्टार खिलाड़ियों की भीड़ जुटाकर नहीं हासिल की जा सकती। अच्छे खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम भावना विकसित करने वाले, खिलाड़ियों को कठिन समय में भी जी-जान से जुटे रहने की मनोदशा में रखने वाले और ठंडे दिमाग से रणनीति बनाने वाले लोगों की भी उतनी ही जरूरत होती है।

टीम का दबदबा सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि एक स्थायी कोरग्रुप बने और उसमें नए सदस्यों की एंट्री भी होती रहे ताकि पूरा कोरग्रुप एक साथ चोटी से नीचे न आ जाए, जैसा पिछले साल चेन्नै सुपरकिंग्स के साथ हो गया था। इसके विपरीत मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन अलग-अलग सीजन में बेहतर बने रहने का कारण उसके कोर ग्रुप में बदलाव और स्थिरता का सही संतुलन है। गौर करें तो आईपीएल ऑक्शन के दौरान फ्रैंचाइजी की प्राथमिकताओं की झलक उसके द्वारा लगाई गई बोलियों में दिखती है।

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